साल
2014 में अंजू शर्मा ने अपनी एक कविता 'चालीस साला औरतेंजब सोशल मीडिया पर पोस्ट की, तो अपनी शैली और अभिव्यक्ति के चलते वह अच्छाखासा चर्चित हुई. नारी अधिकारवादियों ने उसे हाथोंहाथ लिया. अब नव सर्वहारा सांस्कृतिक मंच की ओर से इसी शीर्षक से उनका एक कविता संग्रह प्रकाशित हुआ है. युवा कवि नित्यानंद गायेन के कविता संग्रह 'इस तरह ढह जाता है एक देश' के साथ 'चालीस साला औरतें' का भी लोकार्पण हुआ. दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में संपन्न हुए इस कार्यक्रम में शिवमंगल सिद्धान्तकर, आनन्द स्वरूप वर्मा, गोपाल प्रधान, मंगलेश डबराल और महेश दर्पण ने इन कवियों और उनकी रचनाओं पर अपने विचार रखे तो नित्यानंद गायेन और अंजू शर्मा ने अपनी कविताएं भी सुनाईं. इस कार्यक्रम का संचालन नव सर्वहारा सांस्कृतिक मंच के संयोजक अरुण प्रधान ने किया. 

 

इस बाबत जागरण हिंदी ने जब अंजू शर्मा से उनकी लेखन यात्रा के बारे में बात की तो उनका कहना था, बतौर लेखक और स्त्री अपने आसपास के समय और घटनाक्रम पर आप अपने आप को अभिव्यक्त करने से नहीं रोक सकते. लेखन में मुझे शुरू से ही रुचि रही है और ' कल्पनाओं से परे का समय' नाम से मेरा एक कविता संकलन भी प्रकाशित हो चुका है. मैं इस वक्त कहानियों पर काम कर रही हूं और जल्दी ही मेरा कहानी संग्रह भी छप कर आ जाएगा. मैंने जब  'चालीस साला औरतें' कविता लिखी थी, तो यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, तमाम तरहे की टिप्पणियां आईं. इसके बाद मैं जिस नव सर्वहारा सांस्कृतिक मंच से जुड़ी हूं. मेरी इन कविताओं का प्रकाशन अधिकरण प्रकाशन ने किया है. अब इसी नाम से मेरा संकलन आपके हाथ में है. इस संकलन में कुल 52 कविताएं हैं. इसमें मेरी वे कविताएं भी शामिल हैं जो यह बताती हैं कि एक जागरूक महिला अपने दौर के बारे में क्या सोचती है. इसके अलावा तकनीक और मीडिया ने हमारे जीवन को कैसे छुआ है, मैंने उसके बारे में भी लिखा है.  

 

जागरण हिंदी के पाठकों के लिए उसी संग्रह में शामिल अंजू शर्मा की यह कविताः 

 

 

एक औरत

 

 

 

एक औरत जब मुक्ति की मांग करती है

तो यह निश्चित तौर पर

परिवार, प्रेम या रिश्तों से मुक्ति नहीं होती 

 

एक औरत जब स्वतंत्र होने की बात करती हैं

तो इसका मतलब यह हरगिज़ नहीं होता 

कि वह उच्छृंखल होना चाहती है 

 

एक औरत जब अपनी पसंद के कपड़े

पहनने का हक़ मांगती है

तो इसका मतलब यह नहीं कि

वह सड़क पर नग्न दौड़ना चाहती है 

 

एक औरत जब अपनी कमाई पर हक़ चाहती है

तो इस का अर्थ यह नहीं कि

वह बौरा कर उसे सड़क पर लुटा देगी 

 

एक औरत जब अपने शरीर पर

हक़ की बात करती है

तो इसका अर्थ यह नहीं

कि वह किसी के भी साथ सो जाने को तैयार है 

 

एक औरत सबसे अधिक मज़बूती से

अपने से जुड़े हर पहलू पर

आपके तयशुदा अर्थों से मुक्त होने की मांग करती है,

लेकिन जान लीजिये

 

इसका अर्थ आप जो भी लगायें  

उसे परवाह नहीं ……

, रत्ती भर भी नहीं …….