पटना: बिहार संग्रहालय और ‘रंग विकल्प’ ने मिलकर पटना संग्रहालय सभागार में ' मूर्तिकला और बिहार' पर एक बातचीत का आयोजन किया। इसमें बिहार संग्रहालय के निदेशक युसुफ ने कहा कि सफल " कलाकार वहीं है जो मटेरियल का उचित इस्तेमाल करता हैं। कला पर कलाकारों का अधिकार नहीं होता है। जैसे प्रसिद्ध मूर्तिकार हिम्मत शाह ने मिट्टी को 10 से 15साल तक अपने अनुरुप ढाला है। लेकिन उसके बाद भी इस कला पर ऊनका अधिकार नहीं बन पाया । हिम्मत शाह ने चीजों को जैसा को तैसा नहीं देखा , उसे बहुत आगे देखा। बिहार में रजत घोष का काम फोक तत्व को लेकर बहुत ही शानदार है।" युसुफ के मुताबिक "अब कला वैश्विक हो चुकी है। इस कारण अब दुनिया में भारतीय कला की जगह कहा जाता है की यह भारत के कलाकारों की कला हैं । कला पर स्थानीय चीजों का प्रभाव है, इसे हम बुद्ध की मूर्ति से देख सकते है। भारत मे गौतम बुद्ध की मूर्ति भारतीय परिवेश में बनाई जाती है वही चीन में चीनी परिवेश में बनाई जाती है जिसमे गौतम बुद्ध का चेहरा चीनी लोगों जैसा होता है।"
बिहार सरकार के कला व संस्कृति संबंधी पहल पर यूसुफ ने कहा कि " बिहार संग्रहालय में प्रतिदिन हजारों लोग आते हैं । बिहार की कला के प्रचार-प्रसार और बिक्री के लिए बिहार म्यूजियम उपेन्द्र महारथी शिल्प संस्थान के माध्यम से आर्ट की बिक्री करेगा। जिससे कलाकारों को उनकी कलाओं का उचित दाम मिलेगा। " इस दौरान मधुबनी पेंटिंग,पिकासो की युद्ध विरोधी गुयेर्निका , हेनरी मूर,ब्रान्कुसी ,रजत घोष आदि कलाकारों के महत्व व योगदान पर भी चर्चा हई। बातचीत के समापन में मॉडरेटर अनीश अंकुर ने कहा कि "कला का आनंद लेने के लिए आपको कलात्मक तौर प्रशिक्षित होना होगा" । इस सेमिनार में साहित्यकार अरुण सिंह, रंगकर्मी जय प्रकाश, सन्यासी रेड, गोपाल शर्मा, कैलाशचंद झा, आभा झा, अमरनाथ झा,शरद, अरुण सिंह,अशोक कुमार सिन्हा,आनन्दी बादल, गौतम गुलाल , मुकेश, मनीष, नीतू सिन्हा ,मज़हर इलाही, कामिनी, दीपक, सहित कई प्रबुद्ध लोग उपस्थित थे।
