नई दिल्लीः संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार से संबद्ध दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी व द्वारका क्लब फेडरेशन के संयुक्त तत्वावधान में महिला ऑडिटोरियम ककरोला मोड़ में एक विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. अध्यक्षता सुप्रसिद्ध गीतकार, कवि डॉक्टर जयसिंह आर्य ने की. मुख्य अतिथि राजेश गहलोत थे. संचालन कवि रमेश गंगेले ने किया. कवि सम्मेलन की शुरुआत गीतकार खेमेंद्र सिंह द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ. तत्पश्चात सत्यदेव हरियाणवी ने हास्य व्यंग्य रचनाओं से लोटपोट कर देने वाली रचना सुनाई. धर्मेंद्र जैन लवली ने राम पर वंदना सुनाई, तो डॉ विनोद लावण्या ने विभिन्न रसों में कविताओं को सुना कर वातावरण को रसविभोर किया. हास्य व्यंग्य कवि राजेंद्र चंचल ने हास्य क्षणिकाएं सुनाईं. मनीष मधुकर की ग़ज़ल, संचालक रमेश गंगेले व नरेन्द्र सिंह निहार की कविताओं को भी खूब दाद मिली.
इसके बाद कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे गीतकार डा जयसिंह आर्य ने अपने पचास मिनट के काव्य पाठ में मुक्तकों व गीतों की झड़ी लगा दी. बलिदानी जब तिरंगे लिपटकर अपने गांव आता है, उस समय गांव का वातावरण कैसा हो जाता है, पर सुनाया उनका गीत कुछ इस प्रकार था-
गगन की आंख नम हुईं धरा हृदय दहल गया
ये किसके गम की आंच में पत्थर का दिल पिघल गया
पीटती है सर नमाज, आरती उदास है
चमन से कौन चल दिया कली-कली उदास है
कि रो पड़े हैं गांव तो गली-गली उदास है
श्रोताओं की मांग पर उन्होंने यह मुक्तक भी पढ़ा-
ख़ून तेरा तूझे दगा देगा
दर्द में भी न वो दवा देगा
तूने मां बाप को रूलाया है
तेरा बेटा तुझे सजा देगा.
संचालक रमेश गंगेले व आयोजक धर्मवीर गहलोत ने कवि सम्मेलन की सफलता पर सभी का आभार व्यक्त किया.
