नई दिल्ली: लेखक एवं संपादक प्रेम भारद्वाज के राजकमल प्रकाशन द्वारा छापे गए कहानी संग्रह 'फोटो अंकल' पर ऑक्सफ़ोर्ड बुकस्टोर में एक परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें वक्ताओं ने किताब के शिल्प और समसामयिक मुद्दों से इसके जुड़ाव पर बात की. उन्होंने इस मौके पर प्रेम भारद्वाज के कहानी कहने की शैली और समाज की तल्ख़ सच्चाई को कहानियों में पिरोने के तरीकों का जिक्र करते हुए कहा कि 'फोटो अंकल' की कहानियों में अवसाद व समाज के अंधेरे को व्यक्त करने के लिए 'मेटाफरका सहारा लिया गया है, पर तमाम उदासी और अवसाद के बावजूद इन्हें 'उम्मीद की कहानियां' मानना चाहिए.   

वक्ताओं का कहना था कि बचपन और मृत्यु की चेतना के इर्द-गिर्द घूमने वाली ये कहानियां ज़िंदगी का उदास सच हैं. किताब की मुख्य कहानी फोटो अंकल भोपाल गैस त्रासदी पर आधारित है

 वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम ने कहा, "इस कहानी संग्रह में कमाल की भाषा और शब्दों का प्रयोग दर्शाता है कि लेखक की भाषा पर पकड़ अद्भुत है. इस पुस्तक के जरिये वे पाठकों को काफी जानकारी भी देते हैं. देश-विदेश के मशहूर फोटोग्राफर ,फिल्म स्टार आदि का वर्णन इस पुस्तक में हैं. जिससे लेखक की जानकारी और रिसर्च से रश्क भी हो सकता है, और पाठक चमत्कृत तो होता ही है. इसके अलावा अजीत ने प्रेम भारद्वाज की कहानियों में नेम ड्रापिंग की प्रवृत्ति को भी रेखांकित किया"

 आलोचक संजीव कुमार ने कहा "'फिज़ा में फैज़', 'कसम उस्ताद की' जैसी कहानियां इस कहानी संग्रह की मास्टर पीस हैं. इसके इतर कहानी के कहन पर देखा जाये तो ये कहानियां समसामयिक मुहावरों में कहीं उलझकर रह जाती हैं, जिसमें भाषाई स्तर पर और काम किया जा सकता है."

 लेखिका अल्पना मिश्र ने पुस्तक पर अपनी बात रखते हुए कहा, "इस कहानी संग्रह के ज्यादातर कहानियों से मृत्युबोध का आभास होता है. आज के युग में  विकास के साथ पैदा होती विषमता, बर्बरता के नए रूपों को भी बखूबी से दर्शाता है यह कहानी संग्रह."

लेखक पुरुषोतम अग्रवाल का कहना था, "भाषा की सीमाओं और मुहावरों को दरकिनार नहीं किया जा सकता. जिस तरह की कहानियां प्रेम भारद्वाज ने लिखी हैंउसके लिए वे बधाई के पात्र हैं. उन्होंने हम सभी के जीवन में गहरे तक पैठ कर चुके सोशल मीडिया की सच्चाई को जिस तरह अपनी कहानी में उघाड़ाऐसी ईमानदारी हमें अपने लेखन में निश्चित तौर पर बरतनी होगी."  

कार्यक्रम का संचालन करते हुए साहित्यिक पत्रिका 'पाखी' के संस्थापक अपूर्व जोशी ने कहा, "प्रेम भारद्वाज शब्दों के बाजीगर हैं. फोटो अंकल कहानी संग्रह में उन्होंने शब्दों से बड़ी अच्छी तरह से खेला है.लेखक प्रेम भारद्वाज ने कहा, "इन कहानियों को लिखते समय एक बैचेनी थीजो इनके कथानक में भली-भांति झलकती हैं”. मैं वही लिखता हूं जो महसूस करता हूं”. कार्यक्रम में पहले से ही ऑनलाइन उपलब्ध इस किताब का लोकार्पण भी किया गया.