नई दिल्लीः मध्य प्रदेश में साहित्यिक गतिविधियों से जुड़ी संस्था 'लघुकथा शोध केंद्र भोपाल' ने राजधानी दिल्ली में भी लघुकथाओं के विकास की दिशा में कदम बढ़ाए हैं और अंजू खरबंदा के संयोजन में  लघुकथा-मासिक-गोष्ठी के तहत अपना पहला कार्यक्रम भी किया, जिसका संचालन सतीश खनगवाल ने किया. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता अशोक जैन ने मंच एवं मुख्य अतिथि के रूप में चर्चित अनुवादक और कथाकार सुभाष नीरव मौजूद रहे.  विशिष्ट अतिथि के रूप में अशोक वर्मा और डॉ. आशा सिंह कपूर की उपस्थिति में कथा-पाठन और विमर्श के कई नए आयामों पर बात हुई. इस दौरान लघुकथा शोध केंद्र भोपाल की ओर से सुनिता प्रकाश एवं कान्ता रॉय भी उपस्थित थे. संस्था की मध्यप्रदेश में फैली इकाइयों में से भी कुछ लोगों ने इस कार्यक्रम में शिरकत की, जिनमें लघुकथा शोध केंद्र भोपाल मध्यप्रदेश की शाखा खरगोन के संयोजक विजय जोशी खास थे.


दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से जिन कथाकारों ने गोष्ठी में अपनी लघु रचनाओं के साथ उपस्थिति दर्ज कराई उनमें प्रमुख तौर पर शब्द मसीहा, जानकी वाही, नीता सैनी, रेणु सिंह, मिन्नी मिश्रा, दिनेश भाटिया, अभय राज सिंह, गार्गी, मनोज कर्ण, सदानंद कविश्वर, शिवानी खन्ना आदि के नाम उल्लेखनीय हैं. लघुकथा के विकास पर आयोजित चर्चा के दौरान इस गोष्ठी में अनेक प्रश्नों का निराकरण करते हुए कुछ नवीन बिन्दुओं को भी रेखांकित किया गया. गोष्ठी के अंत में विजय जोशी और महेश्वर ने दिल्ली शाखा की संयोजिका अंजू खरबंदा को पुस्तक सहित उपहार देकर सम्मानित किया. इस संगोष्ठी में इस बात की भी घोषणा हुई कि लघु कथाओं के पठन -पाठन और उनपर चर्चा का यह क्रम निरंतर बना रहे इसके लिए प्रत्येक महीने के प्रथम रविवार को यह मासिक गोष्ठी आयोजित की जाएगी.