नई दिल्लीः साहित्यिक पत्रिका 'सृजन मूल्यांकन' ने प्रख्यात लेखक प्रकाश मनु पर केंद्रित एक विशेषांक निकाला है, जिसका लोकार्पण डॉ मनु के फरीदाबाद स्थित आवास पर हुआ. इस कार्यक्रम में हिंदी साहित्य जगत की अनेक शख्सियतें उपस्थित हुईं, जिनमें शकुंतला कालरा, सूर्यनाथ सिंह, महाबीर सरवर, अशोक प्रियदर्शी, डा. सुनीता, आरती स्मित, सुरेश्वर त्रिपाठी, वेदमित्र शुक्ल, आनंद विश्वास, अखिलेश श्रीवास्तव चमन और ओमप्रकाश कश्यप आदि शामिल हुए. इस विशेषांक के साथ ही डॉ मनु की आत्मकथा 'मेरी आत्मकथा रास्ते और पगडंडियाँ' और उनके दो अन्य बृहत् ग्रंथ 'हिंदी बाल साहित्य के निर्माता' 'प्रकाश मनु के संपूर्ण बाल उपन्यास' (दो खंडों में) तथा डा. सुनीता की पुस्तक 'मेरी प्रतिनिधि बाल कहानियाँ' का भी लोकार्पण हुआ.

कार्यक्रम के आरंभ में 'सृजन मूल्यांकन' विशेषांक के अतिथि संपादक श्याम सुशील ने बताया कि प्रकाश मनु चुपचाप एकांत में लिखने वाले लेखक हैं, पर उनका लिखा वाङ्मय बृहत् है. इसलिए जब रचनाएं आमंत्रित की गईं और साहित्यिकों ने अपने स्नेह भरे संस्मरण और लेख भेजे, तो उन्हें समेटते हुए पहली बार समझ में आया कि मनु जी को प्यार करने वाले कितने लोग हैं.

संपादक अनामीशरण बबल ने सृजन मूल्यांकन पत्रिका के पूर्व विशेषांकों को डॉ प्रकाश मनु की प्रेरणा का प्रतिफल बताया. शकुंतला कालरा ने बताया कि  मनु जी मन में बड़ी योजनाएं लेकर काम करने वाले लेखक हैं और उन्होंने बच्चों और बड़ों दोनों के लिए अपार साहित्य लिखा है. सूर्यनाथ सिंह ने कहा कि हिंदी में लेखक तो बहुत हैं, पर प्रकाश मनु विरले लेखक हैं, जो साहित्य लिखते ही नहीं, साहित्य जीते भी हैं. महाबीर सरवर ने कहा, 'मनु जी को देखकर मुझे आर.के. लक्ष्मण के कार्टून जगत का आम आदमी याद आता है, एक के बाद एक आने वाली मुश्किलें जिसका पीछा नहीं छोड़तीं, पर इसके बावजूद वह अपनी अपनी बात कहता जरूर है.' सुरेश्वर त्रिपाठी, आनंद विश्वास , ओमप्रकाश कश्यप, अखिलेश श्रीवास्तव चमन, अशोक बैरागी, साहित्य रसिक वीरेंद्रप्रताप सिंह, अशोक प्रियदर्शी, युवा लेखक वेदमित्र शुक्ल, स्वामीशरण, डा. सुनीता, आरती स्मित, ममता शरण आदि ने भी अपने संस्मरण शेयर किये. अंत में डॉ मनु ने स्नेह और कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा, 'जीवन के कठिन से कठिन दौर में भी मेरी लेखनी कभी थमी नहीं. लिखना है, लिखना है, और बस लिखना है, यही मेरा जीवन-मंत्र रहा है.