कारवां गुजर गया…कह नीरज चले गए
मन यह मानने को तैयार ही नहीं होता कि कवि नीरज नहीं रहे. वह एक बड़े कवि थे, शिक्षक, शायर या गीतकार इसका फैसला करना मुश्किल है. उनका असली नाम [...]
मन यह मानने को तैयार ही नहीं होता कि कवि नीरज नहीं रहे. वह एक बड़े कवि थे, शिक्षक, शायर या गीतकार इसका फैसला करना मुश्किल है. उनका असली नाम [...]
पटना, 19 जुलाई, बिहार की संवेदनशील महिलाएं जो खामोशी से कुछ रच रही हैं, उनके मौन को स्वर देने के लिए उषाकिरण ख़ान ने एक संस्था का गठन किया है, [...]
18 जुलाई को मनुष्य और मनुष्यता को बचाने के लिए बेचैन कवि-लेखक राजेश जोशी का जन्मदिन है. उन्हें ‘जागरणहिंदी’ की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं. लेखक राजेश जोशी का जन्म 18 [...]
दमोह, 18 जुलाई, हिन्दू पौराणिक कथाओं के राजा नल की पत्नी दमयंती के नाम पर बसा मध्य प्रदेश के सागर संभाग के बुंदेलखंड अंचल का शहर 'दमोह' वर्तमान में अपनी सांस्कृतिक [...]
बीते दिनों घोषित साहित्य अकादमी सम्मानों में बाल-साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए वरिष्ठ साहित्यकार दिविक रमेश को भी यह सम्मान प्रदान करने की घोषणा हुई. इस अवसर पर [...]
व्यवसाय से डॉक्टर और दिल से घुमक्कड़ अजय सोडानी के यात्राओं के दौरान अर्जित अनुभव कविता, निबन्ध, छायाचित्र तथा कहानियों के रूप में देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर प्रकाशित व प्रशंसित होते रहे हैं। ‘दर्रा-दर्रा हिमालय’ के बाद उनकी हालिया प्रकाशित किताब [...]
सुभाष शर्मा ने हिन्दी में कथा लेखन के साथ विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर गंभीरता से काम किया है। बाल श्रम, महिलाअधिकार, पर्यावरण, प्राथमिक शिक्षा,कृषि,संस्कृति,इतिहास जैसे विषयों पर उनका विपुल लेखन हिन्दी में संदर्भ के रुप मेंउपयोग किए जाते हैं।जाहिर है सामाजिक मुद्दों पर चिंतन का दवाब उनकी कहानियों में स्पष्ट महसूस किया जा सकता है।स्वभाविक है ये कहानियां कल्पना से नहीं,विचार से उपजी हुई प्रतीत होती हैं। ये कहानियां ऐसी हैं जिसे हम रोजदेखते,सुनते भोगते हैं,सुभाष शर्मा हमारे दैनंदिनी जीवन के बीच से कहानियां उठाते हैं और अपने वैचारिकता के आवरण केसाथ हमारी संवेदना को चुनौती देते हुए कहानी के रुप में प्रस्तुत करते हैं। ‘ब्रेन हैमरेज’ एक ईमानदारी अधिकारी के संघर्षकी कहानी है ,जिसकी परिणति नायक प्रभाकरण के मौत के रुप में दिखाई देती है।सुभाष शर्मा की कहानियां आमतौर परउम्मीदों पर खत्म होती है,लेकिन कुछेक कहानियों में उनकी बेबसी वाकई पाठकों को डराती लगती है। यहां कहानी कीअंतिम पंक्ति के साथ देश की जैसे बहुसंख्यक जन को वे आवाज दे रहे होते हैं,’धुंध ही धुंध छाई है जारों ओर। न जाने कबछंटेगी यह धुंध भीतर से बाहर तक,व्यक्ति से देश तक’। इस संग्रह की तीन कहानियाँ ‘संदेश’, ‘अपना आदमी कौन’, तथा ‘तूफान में दीया’ शिक्षण संस्थाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार,धोखाधड़ी, अनैतिक चरित्र, छल-छद्म, राजनीतिक हस्तक्षेप आदि का आख्यान प्रस्तुत करती हैं। ‘संदेश’ कहानी की नायिकाअंजुम आरा अपेक्षित सुधार के लिए अपनी प्रशासकीय निष्ठा का परिचय देती है पर प्रतिरोधी शक्तियाँ उसके कार्यों में तरह-तरह की बाधाएँ पहुँचाती हैं। दूसरी तरफ ‘अपना आदमी कौन’ में न सिर्फ अयोग्य बल्कि चरित्रहीन ईश्वरलाल की बहालीमेधा से इतर आधार पर कर ली जाती है। कुछ स्थानीय नेताओं का समर्थन जाति के आधार पर मिल जाता है। कतिपयअधिकारी भी भ्रष्ट शिक्षक का साथ देते हैं, स्थिति तब और विद्रुप दिखने लगती है जब वरीय ईमानदार अधिकारी काहस्तक्षेप भी उसका कुछ नहीं बिगाड पाता। ‘तूफान में दिया’ के शिक्षक नायक शिवनारायण को अपने ही सहकर्मियों औरप्रधानाध्यापक का, गलत काम नहीं करने के कारण, निरंतर विरोध का सामना करना पड़ता है पर अंततः उसकी भी जीतहोती है। सुभाष शर्मा समाज के नकारात्मक पक्षों को उसकी सम्पूर्णता में लाते हैं पर ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की जीतभले ही नहीं दिखती हो,उसका संघर्ष नाउम्मीद नहीं होने देती है। संग्रह में 21 कहानियां संकलित हैं,जो अलग अलग [...]
- आशीष कंधवे और फिर मैं खुद से एक प्रश्न पूछता हूं जब आप अपने हाथों में अपना हाथ डालते हैं तो आप स्वयं से प्रेम करते हैं स्वयं के मित्र होते [...]
. मन में अक्सर सवाल उठता है, ‘नया क्या??’ इसके जवाब में कभी हम सोशल मीडिया के अपने टाइमलाइन को देखते हैं, तो कभी रिमोट के जरिये चैनल ‘सर्फिंग’ में लग जाते हैं| फिल्मों [...]
पत्रकार विष्णु नागर दिल से एक कवि हैं| कवि ह्रदय की साफगोई और खूबसूरत लय उनके गद्य में भी बखूबी देखी जा सकती है| उनके समय की छाप उनके द्वारा [...]