मन के हारे हार सदा रे, मन के जीते जीतः हिंदी जगत ने द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी को किया याद
नई दिल्लीः 'यदि होता किन्नर नरेश मैं राजमहल में रहता,सोने का सिंहासन होता सिर पर मुकुट चमकता. बंदीजन गुण गाते रहते संध्या और सबेरे, निशिदिन नौबत बजती रहती दरवाजे पर मेरे...जैसी बेहद [...]