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ई-संवादी2023-02-03T16:12:06+05:30

प्रताप नारायण मिश्र, आधुनिक हिंदी के इस निर्माता को भी मिली थी केवल 38 वर्ष की उम्र

By |July 7th, 2020|Categories: ई-संवादी|

पंडित प्रताप नारायण मिश्र की पुण्यतिथि पर आधुनिक हिंदी, खड़ी बोली और हिंदी भाषा के लिए उनके योगदान को याद [...]

कोरोना के चलते ऑनलाइन आयोजित हुआ साहित्य अकादेमी का ‘दलित चेतना’ कार्यक्रम

By |July 6th, 2020|Categories: ई-संवादी|

नई दिल्लीः साहित्य अकादमी ने वेबलाइन कार्यक्रम शृंखला के अंतर्गत 'दलित चेतना' पर एक ऑन लाइन कार्यक्रम का आयोजन किया. [...]

रामकथा की बात ही अलगः ‘वैश्विक फलक पर रामायण विश्व कोष’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय वेबिनार

By |July 6th, 2020|Categories: ई-संवादी|

पटनाः संकट जितना गहरा होता है भगवान उतनी ही गहराई से याद आते हैं. खास बात यह है कि भारत [...]

पुण्यतिथि के दिन सोशल मीडिया पर दिन भर याद किए जाते रहे स्वामी विवेकानंद और उनका दर्शन

By |July 4th, 2020|Categories: ई-संवादी|

नई दिल्लीः चार जुलाई को स्वामी विवेकानंद जी अपनी पुण्यतिथि पर पूरे दिन सोशल मीडिया पर याद किए जाते रहे. [...]

बन गया है कंस का अवतार कैसे आदमीः माटी की सुगन्ध समूह द्वारा ऑनलाइन कवि सम्मेलन

By |July 4th, 2020|Categories: ई-संवादी|

नई दिल्लीः कोरोना काल में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के चलते देश के साहित्यकार विभिन्न चैनलों और व्हाट्स समूहों [...]

आलोक धन्‍वा, कवि- जिन्होंने महज एक कविता संग्रह के बावजूद शोहरत की बुलंदियां छू लीं

By |July 3rd, 2020|Categories: ई-संवादी|

पटनाः कोई कवि कम लिख कर भी लंबे समय तक चर्चित रह सकता है, अगर इसको जांचना हो तो सीधे [...]

‘हिंदी साहित्य में राष्ट्रीय चेतना’ विषय पर संस्कृत महाविद्यालय के साहित्य विभाग ने कराया वेबिनार

By |July 1st, 2020|Categories: ई-संवादी|

जसवंतगढ़ः उत्तर प्रदेश में भले ही हिंदी विषय में आठ लाख से अधिक बच्चे माध्यमिक परिषद की परीक्षा में फेल [...]

बाबा नागार्जुन की जयंती पर उनके पटना लगाव व आपातकाल पर लिखी कविताओं की चर्चा

By |July 1st, 2020|Categories: ई-संवादी|

नई दिल्लीः बाबा नागार्जुन की जयंती जून के महीने में दो बार मनती है. फिर इस साल तो कोरोना ने [...]

जंगलों, पहाड़ों और ऐतिहासिक इमारतों ने देवकीनंदन खत्री को बना दिया सबसे लोकप्रिय लेखक

By |June 30th, 2020|Categories: ई-संवादी|

भारतीय साहित्य की दिक्कत यह है कि हम अपने तमाम बड़े लेखकों के जन्मदिन के घनचक्कर में फंसे हैं. चाहे [...]

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