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ई-संवादी2023-02-03T16:12:06+05:30

दरकते हिमालय पर यायावरी

By |June 26th, 2018|Categories: ई-संवादी|

व्यवसाय से डॉक्टर और दिल से घुमक्कड़ अजय सोडानी के यात्राओं के दौरान अर्जित अनुभव कविता, निबन्ध, छायाचित्र तथा कहानियों के रूप में देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर प्रकाशित व [...]

आम जीवन का खरा चित्रण

By |June 19th, 2018|Categories: ई-संवादी|

सुभाष शर्मा ने हिन्दी में कथा लेखन के साथ विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर गंभीरता से काम किया है। बाल श्रम, महिलाअधिकार, पर्यावरण, प्राथमिक शिक्षा,कृषि,संस्कृति,इतिहास जैसे विषयों पर उनका विपुल लेखन हिन्दी में संदर्भ के रुप मेंउपयोग किए जाते हैं।जाहिर है सामाजिक मुद्दों पर चिंतन का दवाब उनकी कहानियों में स्पष्ट महसूस किया जा सकता है।स्वभाविक है ये कहानियां कल्पना से नहीं,विचार से उपजी हुई प्रतीत होती हैं। ये कहानियां ऐसी हैं जिसे हम रोजदेखते,सुनते भोगते हैं,सुभाष शर्मा हमारे दैनंदिनी जीवन के बीच से कहानियां उठाते हैं और अपने वैचारिकता के आवरण केसाथ हमारी संवेदना को चुनौती देते हुए कहानी के रुप में प्रस्तुत करते हैं। ‘ब्रेन हैमरेज’ एक ईमानदारी अधिकारी के संघर्षकी कहानी है ,जिसकी परिणति नायक प्रभाकरण के मौत के रुप में दिखाई देती है।सुभाष शर्मा की कहानियां आमतौर परउम्मीदों पर खत्म होती है,लेकिन कुछेक कहानियों में उनकी बेबसी वाकई पाठकों को डराती लगती है। यहां कहानी कीअंतिम पंक्ति के साथ देश की जैसे बहुसंख्यक जन को वे आवाज दे रहे होते हैं,’धुंध ही धुंध छाई है जारों ओर। न जाने कबछंटेगी यह धुंध भीतर से बाहर तक,व्यक्ति से देश तक’। इस संग्रह की तीन कहानियाँ ‘संदेश’, ‘अपना आदमी कौन’, तथा ‘तूफान में दीया’ शिक्षण संस्थाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार,धोखाधड़ी, अनैतिक चरित्र, छल-छद्म, राजनीतिक  हस्तक्षेप आदि का आख्यान प्रस्तुत करती हैं। ‘संदेश’ कहानी की नायिकाअंजुम आरा अपेक्षित सुधार के लिए अपनी प्रशासकीय निष्ठा का परिचय देती है पर प्रतिरोधी शक्तियाँ उसके कार्यों में तरह-तरह की बाधाएँ पहुँचाती हैं। दूसरी तरफ ‘अपना आदमी कौन’ में न सिर्फ अयोग्य बल्कि चरित्रहीन ईश्वरलाल की बहालीमेधा से इतर आधार पर कर ली जाती है। कुछ स्थानीय नेताओं का समर्थन जाति के आधार पर मिल जाता है। कतिपयअधिकारी भी भ्रष्ट शिक्षक का साथ देते हैं, स्थिति तब और विद्रुप दिखने लगती [...]

हिंदी के महत्वपूर्ण लेखक अभिमन्यु अनत का कुछ दिनों पूर्व निधन हो गया। उनकी समृतियों को संजोते हुए प्रोफेसर रामबचन राय जी ने उनके साहित्यिक अवदानों को समेटते हुए उनको श्रद्धांजलि दी है।

By |June 8th, 2018|Categories: ई-संवादी|

प्रो. रामबचन राय अभिमन्यु अनत मॉरिशस के यशस्वी हिन्दी लेखक थे। उन्हें भारत में भी उतनी ही लोकप्रियता हासिल है, [...]

पता

By |June 8th, 2018|Categories: ई-संवादी|

विनय कुमार समकालीन कविता के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। पेशे से मनोचिकित्सक विनय कुमार का कविता संग्रह मॉल में कबूतर खासा [...]

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